आता हूँ सलीब के पास (Aata hun salib ke paas)
आता हूँ सलीब के पासमैं हूँ अंधा ओ लाचार मेरी आँख है क्रूस पर ख़ासहूँ नजात का तलबगार क्रूस ही मेरी है पनाहसिर्फ क्रूस पर है निगाहबोलता हूँ मैं क्रूस की जययेशु अब बचाता है मैं आवारा बे-तस्कीनकामिल राहत पाता हूँसुनता अब यह कौल शीरीनतुझ को मैं बचाता हूँ तुझे सब कुछ देता हूँतुझे अपना कहूंगातेरी चीज़े लेता हूँतेरा नित मैं रहूँगा तुझ पर मेरा है … Continue reading आता हूँ सलीब के पास (Aata hun salib ke paas)
