है दी आवाज फरिष्तों ने,
जमीं के लोगों को – उतर आया जहां में आज
खुदा इन्सान बनके, है दी आवाज…
वह आया है गुनाह की कैद से आजाद करने को
जो उजड़े जिन्दगी के बाग, उन्हे आबाद करने को
ना हो मांयूस-2 खुदा आया
उमिमदों का जहा बनके, उतर आया…
हमारे वास्ते वह आसमानी प्यार लाया है
नया जीवन, नई रहे नया संसार लाया है
कभी जो खत्म न हो आया ऐसी दास्ता बनके, उतर आया…
जो बैठे है अन्धेरों में वो आए रोशनी लेके
घमों में रहने वाले जिन्दगी की हर ख़ुशी ले ले
वो आया है-2 खुदा इन्सान बनके मेहरबां बनके, उतर आया…
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